हेलो दोस्तों मैं आदित्य, आज मैं एक नई सेक्स स्टोरी लेकर आ गई हूं जिसका नाम है “देसी पउआ पीके महिला मजदूर की चूत गांड चोदी – desi gand chudai” यह कहानी राजू की है आगे की कहानी वह आपको खुद बताएँगे मुझे यकीन है कि आप सभी को यह पसंद आएगी।
दोस्तो, मैं आपका दोस्त राजू एक और सेक्स कहानी लेकर हाजिर हुआ हूँ
यह न केवल एक सेक्स कहानी है बल्कि एक सच्चाई भी है कि किस तरह से पुरुष मिस्त्री और स्त्री लेबर के बीच सेक्स संबंध बन जाता है
शुरुआत में तो स्त्री लेबर को कुछ दिक्कत हो सकती है लेकिन बाद में वह खुद ही गैर मर्द के साथ सेक्स संबंध बनाने के लिए आतुर हो जाती है (desi gand chudai)
इसके कई कारण हो सकते हैं
जैसे कि पति के द्वारा अच्छे से संभोग का सुख न देना, धन के लालच से सेक्स का सुख मिल जाना … कभी कभी काम की जरूरत के चलते स्त्रियां खुद ही अपने साथ वाले मिस्त्री सुपरवाइजर या मैनेजर के नीचे बिछ कर अपना उल्लू सीधा कर लेती हैं
आज की सेक्स कहानी इसी तरह के सेक्स संबंधों को लेकर है (desi gand chudai)
इस कहानी का मुख्य नायक एक राजमिस्त्री है, जो रेती-सीमेंट से मकान की दीवारों का प्लास्टर करता है
इस मिस्त्री का नाम हरिष है वह पेशे से मकान निर्माण वाला एक राजमिस्त्री है
हरिष एक ठेकेदार के यहां काम करता था
उसकी उम्र लगभग 48 साल की है लेकिन वह बड़ा ही बलिष्ठ है और उसे रोजाना नई चूत चोदने की आदत थी
हरिष अकेला ही रहता है क्योंकि वह बचपन में ही घर से भाग गया था (desi gand chudai)
उसकी जिंदगी की शुरुआत कुछ ऐसी हुई थी जिससे उसे सेक्स की आदत लग गई थी
दरअसल हुआ यह था कि जब वह बचपन में घर से भागा था तो उसने कुछ दिन रोडवेज़ के एक ट्रक पर क्लीनर का काम किया
उसने वहां गाड़ी चलानी सीख ली
फिर एक दिन उसके ड्राइवर ने नशे की हालत में उसकी गांड चोद दी थी तो उसने अपनी तनख्वाह लेकर वहां से काम छोड़ दिया था (desi gand chudai)
वह उधर से मुंबई आ गया और उधर उसने एक ठेकेदार के पास मिस्त्री के नीचे काम करना शुरू कर दिया
हरिष होशियार था तो वह उधर जल्दी ही काम सीख गया
कुछ दिनों बाद वह खुद भी एक मिस्त्री का काम करने लगा
अब वह काफी होशियार हो गया था तो कैसा भी काम मिलता, वह उसे जल्दी ही कर लेता था
अब उस इलाके के होशियार मिस्त्री लोगों में उसका नाम चलने लगा था (desi gand chudai)
ठेकेदार भी उसे सबसे पहले काम देने लगे थे और वह जिस भी लेबर को अपने साथ काम पर रखने के लिए ठेकेदार से सिफारिश करता, उसे तुरंत काम मिल जाता
क्योंकि ठेकेदार का काम ऐसा था कि वह मिस्त्री को अपने साथ काम करने वाले बिगारी और बाई को चुनने की छूट दे देता था
बिगारी और बाई का मतलब मजदूर पुरुष और महिला से है
इसमें होता यह था कि मिस्त्री ने जिसे चुना, उसको काम मिल जाता था, बाकी सारे दिन बिना काम के रह जाते थे
हरिष के साथ भी ऐसा ही होता था (desi gand chudai)
उसके साथ कई बार ऐसा भी होता था कि जो बिगारी या बाई काम पर जाने से मना करता, आगे से हरिष उसे कभी भी अपनी साइट पर काम नहीं करने देता
इसलिए उसके पास काम के लिए बिगारी और बाई की खासी संख्या थी
वह बाई या महिला लेबर की खूबसूरती को देख कर अपने साथ काम पर लगाता था
धीरे धीरे हरिष को यह आदत पड़ गई थी कि उसके साथ जो बाई काम करती थी, उसको वह दुपहर में लंच टाइम में ही चोद लेता था
यदि बाई ने चुदने से ना कहा तो वह उसे आगे से कभी भी काम पर नहीं लेता था (desi gand chudai)
इसका मतलब यह भी होता था कि उस बाई को उस इलाके में काफी दिनों तक काम नहीं मिल सकता था
ऐसे ही एक दिन हरिष को 10वें माले पर काम करना था
उधर उसे बाथरूम में प्लास्टर करने का काम था
वह साइट पर आया, तो उसे एक नई बाई दिखी जो काम के इंतज़ार में बैठी थी
हरिष के आते ही सब बाइयां खड़ी हो गईं (desi gand chudai)
हरिष ने सबको देखा, उनमें उसे एक नया चेहरा दिखा
वह कम उम्र की एक देसी लौंडिया थी
हरिष ने उसे करीब बुलाया और उसका नाम पूछा
उस लड़की ने अपना नाम पारो बताया
हरिष ने उससे कहा तुम चलो
फिर उसे एक बिगारी यानि पुरुष लेबर को भी लेना था तो पारो बोली मेरे पति को भी ले लो ना!
हरिष बोला ठीक है बुला ले उसे!
अब वे दोनों मियां-बीवी साथ में मजदूरी का काम करने रेडी हो गए थे
पारो ने अपने पति को बुलाया (desi gand chudai)
हरिष ने उन दोनों को 9 वें माले पर जाकर माल मिक्स करने का बोल दिया
कुछ देर बाद वह भी वहां पहुंच गया
पारो का पति बाहर प्लास्टर का माल सीमेंट-रेती मिक्स करने लगा था और पारो माल लेकर हरिष को तगाड़ी यानि तसला भर कर देने का काम करने लगी
पारो वहीं हरिष के पास खड़ी रहती
काम दुपहर तक चला
इस बीच हरिष ने पारो को काम करते-करते छुआ तो पारो ने हंस कर हरी झंडी दे दी
ये देख कर हरिष का मूड बन गया (desi gand chudai)
जब खाना खाने का समय होने वाला था तो रोज़ की तरह उसने पारो के पति से कहा कि तू नीचे जा और बाकी बिगारी के साथ काम कर, अभी इतना माल काफी है, काम हो जाएगा
वह बिचारा वहां से नीचे जाकर काम में लग गया
यहां हरिष ने काम खत्म किया और अपनी जेब से दारू का पौवा निकाल कर गटक लिया
ये हरिष का पसंदीदा समय था तो वह मूड बना कर अपनी जुगाड़ को चोद देता था
फिर आज तो एक देसी माल चुदने को राजी थी
दारू पीने के बाद हरिष ने एक बीड़ी सुलगाई और पारो को अपने पास बुलाया
पारो जैसे ही उसके पास आई तो उसने उसको अपनी बांहों में पकड़ लिया
पारो ने भी कोई आना-कानी नहीं की (desi gand chudai)
उसने पहले गैर मर्द के साथ ये सेक्स वाला काम किया था तो उसे मालूम था कि उसका मिस्त्री उसको चोदकर ही रहेगा
हरिष ने उसे किस करना शुरू किया
वह पारो के पिछवाड़े पर हाथ फेरने लगा
बीच-बीच में वह उसकी चूची को भी दबा देता
पारो एक डीजल माल थी, मतलब वह ऊंचाई में थोड़ी कम थी और दिखने में कयामत थी
वह भी अब तक कई मिस्त्रियों का पानी अपने अन्दर गिरवा चुकी थी
इसलिए पारो भी अपने पैर ऊपर उठा कर हरिष का साथ दे रही थी (desi gand chudai)
हरिष ने वहीं पड़ी एक काली त्रिपाल पर उसे लिटा दिया और अपनी पैंट खोल कर पारो के ऊपर चढ़ गया
पारो ने खुद अपने हाथ से अपनी साड़ी ऊपर कर ली और हरिष ने पारो के पैरों को फैला कर अलग कर दिया
फिर हरिष ने अपना तनतनाता हुआ लौड़ा हाथ से पकड़ कर पारो की चूत पर टिकाया और उसको चूत की फांक में घिसने लगा
पारो भी उस हरकत से कामातुर हो गई और उसने हरिष को अपने सीने पर खींच लिया
हरिष ने एक हाथ से उसकी चूत की दोनों फाँकों को अलग किया और अपने लंड को उसकी चूत में अन्दर फँसा दिया
फिर हरिष ने पारो की कमर पकड़ कर कमर से झटका देते हुए उसको अपने बदन पर खींच लिया (desi gand chudai)
हरिष के इस प्रहार से पारो को एक झटका लगा और उसी पल हरिष का पूरा लंड एक झटके में अन्दर घुस गया
हरिष का लंड इतना तगड़ा और लंबा था कि पारो की चीख निकल गई
उसने हरिष के बदन में अपने नाखून गाड़ दिए
हरिष को तकलीफ हुई, पर उसने सह लिया (desi gand chudai)
यहां पारो की हालत खराब हो गई थी
हरिष का औज़ार उसके पति से डबल बड़ा और काफी मोटा था
उसने इतने मिस्त्रियों से अपनी चूत चुदवाई थी लेकिन अभी तक इतना बड़ा लंड अपनी चूत में नहीं लिया था
शायद हरिष के बड़े और mota land होने के कारण औरतें हरिष के पास काम करने के लिए उतावली रहती थीं
पर पहली बार में इतने बड़े लौड़े से चुदने से पारो की हालत खराब हो गई थी (desi gand chudai)
हरिष का नुकीला तीर उसकी चूत की जड़ में अन्दर तक घुस चुका था
अब तो पारो को अपने अन्दर हरिष के लौड़े की चुभन को सहना ही था
ये सोचकर पारो चुदाई में डूबती गई थी कि कुछ देर में सब सही हो जाएगा
वह सही सोच रही थी क्योंकि लंड कितना भी बड़ा क्यों न हो, आखिर में चूत उसके अनुसार अपने आप को फैला ही लेती है
शुरू में तो हरिष के औज़ार ने पारो की चूत में हलचल मचा दी थी
पर बाद में पारो को मजा आने लगा था (desi gand chudai)
हरिष ने पारो को अपनी बांहों में उठाया और उसे धकापेल चोदने लगा
पारो हरिष जैसे सांड के सामने एक बकरी की तरह लग रही थी
वह हरिष की बांहों में जकड़ी हुई पूरी हवा में थी और एक मजबूत मर्द के हाथों में झूल रही थी
ये पोज़ भी पारो के लिए नया था
इस पोज़ की वजह से हरिष का लंड पारो की बच्चेदानी को ठोकर मार रहा था
उसकी चूत की दीवारें बहुत ज्यादा घिस रही थीं (desi gand chudai)
हरिष के मूसल लौड़े से पारो की सारी नसें हिल गई थीं
उसे भारी दर्द हो रहा था, पर हरिष के गले में झूलती हुई अपनी आंखों में मीठे दर्द के आंसू लिए पारो हरिष के लंड का हर वार अपनी चूत में झेल रही थी
हर धक्के पर पारो आह हम्म आह की मादक आवाज़ निकाल रही थी
धक्कों पर धक्के लग रहे थे
वे दोनों पसीने से लथपथ हो गए थे (desi gand chudai)
ये लंड-चूत का खेल हरिष बड़ी उस्तादी से खेल रहा था
कुछ देर बाद पारो की चूत ने अपना रस छोड़ा तो हरिष के लंड को … और पारो की चूत को इससे आसानी हो गई चूत में चिकनाई बढ़ गई थी … तो लंड सटासट चलने लगा था
हरिष अब खड़े-खड़े ही पारो को उछाल-उछाल कर चोद रहा था
पारो की टांगें अब दर्द करने लगी थीं
हरिष ने उन्हें अपने हाथों में पकड़ रखा था
कुछ देर बाद हरिष ने पोज़ बदला (desi gand chudai)
उसने पारो को नीचे उतार कर बिठा दिया और उसके मुँह के सामने लंड कर दिया
पारो समझ गई कि हरिष क्या चाहता है
पर लंड पर लगे अपने माल और चिकनाहट को देख उसे घिन आई
उसने हरिष को लंड मुँह में लेने से मना कर दिया
फिर हरिष ने उसे उठाकर खड़ी कर दिया और अब उसे पलटा कर थोड़ा आगे को झुका दिया
हरिष खुद नीचे बैठ गया और पारो की चूत और गांड के छेद को चाटने लगा
उसके इस कारनामे से पारो के बदन में करंट सा दौड़ गया
वह उत्तेजना से सिहर उठी
वह इस्स्स आह्ह्ह करने लगी (desi gand chudai)
फिर वह अपना एक हाथ पीछे ले जाकर हरिष के सर को अपनी गांड पर दबाने लगी
पारो की चूत ने फिर से पानी छोड़ना चालू कर दिया
उसकी गांड का छेद भी हरिष की ज़ुबान के थूक से गीला हो गया था
हरिष उठकर खड़ा हो गया
उसने पारो को और थोड़ा आगे झुकाया अपने लंड को अपने ही थूक से सान दिया
फिर लंड को उसकी गांड के छेद पर रखकर उसकी कमर पकड़ ली
गांड के छेद पर लंड का स्पर्श पाकर पारो मुड़ी ही थी कि हरिष ने एक तेज़ धक्का मारा (desi gand chudai)
एक ही शॉट में हरिष का आधे से ज़्यादा लंड पारो की गांड में घुस चुका था पारो को बहुत दर्द हुआ
वह ज़ोर से चीखी अम्माह्ह्ह बहुत दर्द हो रहा है … मुझे छोड़ दो … आह निकालो अपना सामान … मैं मर गई … आह सामान है या गधे का लंड गांड में क्यों डाला मिस्त्री
हरिष ने कुछ न सुनते हुए एक और तगड़े धक्के में अपना पूरा लंड पारो के पिछवाड़े में घुसेड़ दिया
आई अइओ … साला हरामी … निकाल ना!
पारो छटपटाने लगी (desi gand chudai)
वह हरिष की पकड़ से निकल कर भागने की कोशिश कर रही थी पर हरिष की पकड़ से आज तक कोई नहीं निकल सका था
हरिष के ऊपर दारू का नशा जोर मारने लगा था
उसने पारो को उसी हालत में चोदना चालू कर दिया
बीच-बीच में हरिष अपने लंड पर थूक देता, उससे पारो की गांड के रास्ते में चिकनाई बनी रहती
कुछ देर बाद पारो की गांड ने हरिष के लंड को एडजस्ट कर लिया
अब पारो को भी अपनी गांड चुदवाने में मज़ा आने लगा था (desi gand chudai)
वह भी पीछे हो-होकर गांड चुदवाने लगी
हरिष थोड़ा उस पर और झुक गया और उसकी चूत को अपने हाथों से कुरेदने लगा
यहां लंड गांड में घुसता, वहां पारो की चूत में हरिष उंगली करने लगता
पारो उसकी इस हरकत से पागल हुई जा रही थी (desi gand chudai)
कुछ देर के बाद उंगली की करामात रंग लाई
पारो झड़ने को तैयार हो गई. यहां हरिष का भी लंड गांड के अन्दर फूलने लगा और कुछ ही समय में दोनों झड़ने लगे
हरिष ने लंड की धार से उसकी गांड भर दी
लंड की आखिरी बूँद गिरने तक हरिष का लंड पारो की गांड से बाहर नहीं आया
जब लौड़े से रस खाली हो गया तो वह स्वतः ही गांड से बाहर आ गया (desi gand chudai)
हरिष ने अपनी पानी पीने की बॉटल में से पानी लेकर लंड को साफ किया
पारो ने अपने पास के एक कपड़े से अपनी चूत और गांड साफ की
उसकी गांड अब दर्द कर रही थी
उससे ठीक से चला नहीं जा रहा था
हरिष खाना खाने के लिए नीचे उतरा (desi gand chudai)
तो पारो भी उसके पीछे नीचे उतरने लगी
पर 8 वें माले पर लंगड़ाती हुई चलने से उसे ज़ोरों की सुसु लग आई थी
उसने सोचा कि यहीं बाथरूम में जगह देखकर मूत लेती हूँ
वह जैसे ही अन्दर घुसी, वहां दूसरा मिस्त्री उसकी पति की बहन को नीचे लिटा कर चोद रहा था
वे दोनों चुदाई में मस्त थे (desi gand chudai)
उसकी ननद ही उसे यहां काम पर लाई थी
पारो ने थोड़ी देर खड़ी होकर दोनों की चुदाई का मज़ा लिया
पर जब उसकी ननद ने उसे देखा तो वह वहां से निकल गई
हालांकि उसकी ननद चुदाई पूरी करवाने के बाद ही वहां से निकल पाई थी
जब ननद बाहर निकली तो पारो खड़ी थी और उसकी राह देख रही थी
उसकी ननद शर्माती हुई करीब आई (desi gand chudai)
पारो ने उसे देखा तो वह बोली- क्या भाभी आप भी पारो हंस दी
फिर जब वे दोनों चलने लगीं तो अपनी भाभी को लंगड़ाती देख पारो की ननद बोली भाभी क्या हुआ
तो पारो डरती हुई बोली पैर में मोच आ गई है!
तो उसकी ननद बोली भाभी मुझे मालूम है ये मोच कैसे आती है मैंने भी काम किया है हरिष के हाथ के नीचे मुँआ सब जगह चोदता है और पिछवाड़े का होल तो सुजा ही देता है (desi gand chudai)
मैं भी एक हफ्ते तक लंगड़ाती रही थी पर एक हफ्ता उसने मुझे ही
साथ में रखा अभी तुम्हारी बारी शुरू हुई है पूरे हफ्ते लँगड़ाने के लिए तैयार हो जाओ!
वे दोनों हंसने लगीं
बस फिर क्या था पारो एक हफ्ते तक रोज़ चुदवाती रही (desi gand chudai)
दुपहर में हरिष चोदता और रात को झोपड़े में उसका पति उसे चोदता था
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