दीदी की दोस्त ने दिया चूत का असली मजा – holiday me chudai

हेलो दोस्तों मैं आदित्य, आज मैं एक नई सेक्स स्टोरी लेकर आ गई हूं जिसका नाम है “दीदी की दोस्त ने दिया चूत का असली मजा – holiday me chudai” यह कहानी सौरव की है आगे की कहानी वह आपको खुद बतायगे मुझे यकीन है कि आप सभी को यह पसंद आएगी।

मुंबई के उस मध्यमवर्गीय फ्लैट में गर्मियों की छुट्टियाँ चल रही थीं।

मैं सौरव 21 साल का कॉलेज का आखिरी साल। मेरी दीदी प्रिया 26 साल की

शादीशुदा लेकिन पति के साथ अलग शहर में रहती थी।

इस बार दीदी अकेली आई थीं अपने साथ अपनी सबसे अच्छी दोस्त को लेकर नाम था तन्वी।

तन्वी 24 साल की थी लेकिन देखने में 20 की लगती थी। (holiday me chudai)

लंबे काले बाल गोरी चिकनी त्वचा भरी-भरी चूचियाँ जो टॉप में मुश्किल से समाती थीं

पतली कमर और गोल-मटोल गांड जो जींस में उभरकर आती थी।

दीदी ने बताया था कि तन्वी का ब्रेकअप हो गया है इसलिए वो भी छुट्टियाँ मनाने आई है।

पहले दिन ही जब तन्वी घर आई तो मेरी नजर उस पर अटक गई।

वो मुस्कुराई हाय सौरव दीदी ने बहुत तारीफ की थी तुम्हारी। (holiday me chudai)

उसकी आवाज मीठी थी लेकिन आँखों में एक शरारत थी जो मुझे अंदर तक छू गई।

मैंने शरमाते हुए कहा नमस्ते भाभी… मतलब तन्वी जी। दीदी हँस पड़ी अरे पागल भाभी नहीं सिर्फ दोस्त है।

रात को खाना खाने के बाद दीदी थक गईं और सोने चली गईं।

तन्वी और मैं बालकनी में बैठे थे। गर्मी थी लेकिन हवा अच्छी चल रही थी।

तन्वी ने शॉर्ट्स और टॉप पहना था। उसकी जाँघें नंगी थीं चमक रही थीं। (holiday me chudai)

हम बातें करने लगे कॉलेज ब्रेकअप जिंदगी। तन्वी ने कहा सौरव तुम बहुत हैंडसम हो।

दीदी कहती है तुम अभी भी सिंगल हो। मैंने हँसकर कहा हाँ कोई मिली नहीं जो तुम जैसी हो।

वो शरमा गई लेकिन नजरें हटाई नहीं।

धीरे-धीरे बातें निजी होने लगीं। तन्वी ने बताया मेरा ब्रेकअप इसलिए हुआ क्योंकि वो मुझे संतुष्ट नहीं कर पाता था।

मैं चौंक गया। मतलब? तन्वी ने मुस्कुराकर कहा मतलब… चूत के मजे नहीं दे पाता था। (holiday me chudai)

वो शब्द सुनकर मेरा लंड हिल गया। मैंने हिम्मत करके कहा तन्वी अगर तुम चाहो तो… वो मेरी तरफ झुकी सौरव दीदी सो रही हैं।

अगर तुम सच में चाहते हो तो आज रात मैं तुम्हें चूत के असली मजे दे सकती हूँ। लेकिन ये राज रहेगा।

मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था। हम चुपके से मेरे कमरे में चले गए।

दरवाजा बंद किया। तन्वी ने मुझे दीवार से सटाकर चूम लिया। उसके होंठ नरम गीले। (holiday me chudai)

उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी। सौरव तुम्हारा बदन अच्छा है वो फुसफुसाई।

मैंने उसके टॉप को ऊपर किया। ब्रा नहीं पहनी थी। उसकी चूचियाँ बाहर आईं गोल भारी गुलाबी निप्पल्स खड़े थे।

मैंने उन्हें चूसा दबाया। तन्वी की सिसकारी निकली आह… और जोर से… चूसो…

वो मेरे सामने घुटनों पर बैठ गई। मेरी शॉर्ट्स उतारी। मेरा लंड सख्त होकर बाहर आ गया। (holiday me chudai)

तन्वी ने उसे हाथ में पकड़ा वाह… कितना मोटा और लंबा है। दीदी को पता चले तो जल जाएगी।

वो मुस्कुराई और मुंह में ले लिया। गर्म नरम मुंह।

वो चूस रही थी जीभ घुमा रही थी गहरे तक ले जा रही थी। (holiday me chudai)

मैं उसके बाल पकड़कर उसके मुंह में धक्के मारने लगा। तन्वी… कितना अच्छा चूसती हो…

फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। उसकी शॉर्ट्स और पैंटी उतारी।

उसकी चूत साफ गुलाबी पहले से गीली थी। मैंने उंगली डाली। (holiday me chudai)

आह… सौरव… अंदर… वो कराह रही थी। मैंने झुककर चाटना शुरू किया।

उसकी चूत का स्वाद मीठा-नमकीन। क्लिटोरिस को जीभ से सहलाया। तन्वी की कमर उठ रही थी।

हाँ… वहीं… चाटो… मुझे चूत चाटने का बहुत शौक है…

दीदी की दोस्त होने के बावजूद आज तुम मेरी चूत के मालिक हो… (holiday me chudai)

मैंने अपनी उंगलियाँ अंदर-बाहर कीं। तन्वी चीख रही थी और… तेज… फिंगर करो… वो झड़ गई

चूत से पानी निकला। लेकिन वो रुकी नहीं। अब अपना लंड दो।

मैंने उसे सीधा लिटाया। लंड की नोक उसकी चूत पर रखी और धीरे से दबाया।

आह… फट जाएगी… लेकिन डालो… पूरा डालो… मैंने एक झटके में पूरा लंड अंदर कर दिया।

तन्वी की आँखें बंद हो गईं। कितना Mota Land है… मेरी चूत फाड़ दो आज…

मैं धक्के मारने लगा धीरे से शुरू फिर तेज। (holiday me chudai)

हर धक्के पर तन्वी की चूचियाँ उछल रही थीं। मैं उन्हें दबाता चूसता।

तन्वी तुम्हारी चूत कितनी तंग और गर्म है। वो कराह रही थी हाँ… चोदो मुझे…

दीदी की दोस्त की चूत चोदो… जोर से… हमने पोजिशन बदली।

वो डॉगी स्टाइल में हो गई। मैंने पीछे से पकड़ा लंड अंदर डाला। उसकी गांड हिल रही थी।

मैंने गांड पर थप्पड़ मारा। तुम्हारी गांड भी बहुत सेक्सी है। (holiday me chudai)

तन्वी बोली Gand Ki Chudai करना चाहते हो तो करो… आज सब कुछ दो।

रात भर हम चोदते रहे। कभी वो ऊपर मेरी गोद में बैठकर उछल रही थी

चूचियाँ मेरे मुंह में। कभी मैं उसे दीवार से सटाकर खड़े-खड़े चोद रहा था।

तन्वी कई बार झड़ चुकी थी। आखिर में मैंने उसके मुंह में पानी छोड़ा।

वो सब पी गई स्वाद अच्छा है तुम्हारा। (holiday me chudai)

सुबह होने से पहले हम थककर लेट गए। तन्वी मेरे सीने पर सिर रखे थी।

सौरव ये सिर्फ छुट्टियों का मजा है। दीदी को कभी मत बताना।

लेकिन जब तक मैं यहाँ हूँ रोज रात को मेरी चूत के मजे लेना।

मैंने उसे चूमा। पक्का। तुम्हारी चूत अब मेरी है। (holiday me chudai)

अगले 15 दिन तन्वी ने मुझे चूत के वो मजे दिए जो मैं कभी भूल नहीं पाऊँगा।

दीदी को कुछ नहीं पता चला। वो सोचती थी हम अच्छे दोस्त बन गए हैं।

लेकिन असल में तन्वी मेरी चोदने वाली दोस्त बन गई थी।

छुट्टियाँ खत्म हुईं तो तन्वी चली गई लेकिन वो यादें वो चूत की गर्माहट वो सिसकारियाँ आज भी ताजा हैं।

कभी-कभी दीदी जब बात करती है तन्वी की तो मैं मुस्कुरा देता हूँ। (holiday me chudai)

दीदी नहीं जानती कि उनकी दोस्त ने उनके छोटे भाई को चूत के असली मजे सिखा दिए थे।

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